Thursday, 9 February 2017

औरत की हवस (Aurat ki havas) ...


लेकिन धीरे धीरे हम दोनों के बीच की दूरियाँ बढ़ने लगी, वो मुझसे कटने लगे और हर बात पर मुझे डाटना, गाली गलॊच करना जैसे उनकी कोई आदत हो गयी थी! अब मेरी ज़िन्दगी का नायक एक खलनायक का रूप ले चुका था! मुझे अब उनसे बात करते हुए भी डर लगने लगा था!

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