Sunday, 12 February 2017

हवस की शिकार एक नारी (Havas ki shikaar ek naari)


मैं चाहकर भी उसे नहीं भुला पा रही थी. क्यों वो मेरे ज़िन्दगी में आया क्यों उसने इतने प्यार के सपने दिखाए क्यों एक वादा किया? और फिर एक ही पल में सब कुछ छोड़ कर चला गया. आज मुझे अपने आप से नफरत हो रही है, मैं टूट चुकी हूँ. लेकिन आज भी उन्ही पलो को याद करती हूँ. भूलना चाहती हूँ लेकिन ना चाहकर भी नहीं भुला पाती!

बात उन दोनों की है जब मैं पहली बार दिल्ली अकेले आयी! ना कोई जानकार ना कोई दोस्त! मैंने ईस्ट दिल्ली (लक्ष्मी नगर) में एक कमरे का फ्लैट किराये पर लिया! और जॉब के लिए अप्लाई करना शुरू कर दिया! इत्तेफाकन मुझे एक अच्छी नौकरी साउथ एक्सटेंशन पार्ट २ में मिल गयी! मेरी टाइमिंग सुबह ९ बजे से शाम ८.३० बजे तक होती! मुझे अपने काम में मजा आने लगा! ऑफिस में करीब २० लोग थे, और सभी से मेरी अच्छी बनने लगी! उम्र में मैं सबसे छोटी (२४ साल) जो थी!

एक दिन जब मैं ऑफिस से घर वापस जा रही थी तो, एक लड़के ने मुझे अपनी मोटरसाइकिल पर लिफ्ट देने को कहा और मैंने मन कर दिया! फिर वो मुझसे बोला की वो भी लक्ष्मी नगर में रहता है और मेरे ही घर के पास उसका घर है! वो भी साउथ एक्स पार्ट २ में सॉफ्टवेर कंपनी में काम करता है! उस दिन मैंने उसे मना कर दिया!
और उसी शाम की मैंने देखा की वही लड़का २ घर छोड़कर अपने छज्जे पर खड़ा मुझे  देख रहा है! मैंने उसे देखा और मेरे होठो पर एक मुस्कान आया गयी! उसने इशारे से मुझे हेल्लो कहा और मैं मुसुकुरा के अपने घर पर आ गयी.

पढ़े पूरी कहानी.....http://www.myspicystories.com

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